रविवार, 19 फ़रवरी 2012

                                                     महाशिवरात्रि का पावन पर्व 

इस बार महाशिव रात्रि सोमवार को है और ये दिन शिव को बहुत पसंद है . बहुत ही शुभ दिन है यह और इस दिन शिव के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हो जाना सर्वोतम सुख है. फाल्गुन मॉस की कृष्ण चतुर्दसी की रात्रि को महा शिवरात्रि की संज्ञा दी गयी है।
                       इशान संहिता में बताया गया है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दसी की रात्रि को कल्प के आरंभ में सृस्तिकर्ता बरम्हा को सृस्ती निर्माण का अभिमान हो जाने के कारन जब भगवन विष्णु से उनका विवाद निश्चित   हो गया तो भगवन शिव सूर्य के सामान तेज लेकर लिंग के रूप में प्रकट हुए ।

गुरुवार, 24 नवंबर 2011

        मन

मन एक आकाश है
जहाँ तारे हैं, सूरज है और चाँद भी 
एक चंचलता है 
आजादी उड़ने की है और स्थिरता भी 
एक आवाज है 
अपनी और प्रकृति की भी 
काश!
कि खो जाते मन में 
हो जाते मन के
छुट जाती चिंताएं 
भूल जाती इच्छाएं 
बस होता 
एक उन्मुक्त  गगन
एक खाली मन 
और होती हमारी ऊँची उड़ान 
मन से मन तक . 
 
    





  

रविवार, 30 अक्टूबर 2011

surya shashti vrata

                                                     पवित्र व्रत सूर्य षष्ठी 
 आस्था के समुन्दर में डुबकी लगाते ही हमारा मन पवित्र हो जाता है. आज से बिहार और उत्तरप्रदेश का सबसे आस्थावान व्रत छठ शुरू हो चूका है . नहाय-खाय या फिर कद्दू-भात खाने से आरम्भ होने वाला ये व्रत काफी कठिन होता है. व्रती आज स्नान कर पवित्र होकर प्रथम आहार के रूप में कद्दू-भात खाती हैं . अगले दिन खरना होता है जिसमे रसिया जो गुड और चावल से बनता है उसे दिन भर निर्जला रह रात में खाती है. उसके अगले दिन भी निर्जला रह शाम को भगवन भाष्कर को अर्घ्य देती हैं पुनः अगले दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देती हैं और तब प्रसाद से पारण करती हैं. इस तरह यह तीन दिनों के उपवास वाला कस्तपूर्ण व्रत पूर्ण होता है.   

शुक्रवार, 2 सितंबर 2011

              जय गणेश देवा 
 बड़ी धूमधाम है, गणेश जी का आगमन जो हो चूका  है और साथ में है नए  गानों की धूम. गणेश जी प्रसन्न हो या  न  हो भक्त  तो प्रसन्न हैं. बजे गाजे  के  साथ मस्ती भी  खूब हो  रही है और  रात में ये  मस्ती और भी बढ़  जाती है. 
              मुझे गणेश सबसे  अच्छे   देवता लगते हैं  क्योंकि मई उन्हें हर साल राखी जो बांधती हूँ और  बदले  में कुछ  मांगती  भी हूँ लेकिन अभी  तक जिस  चीज  की ज्यादा  मांग की वो नहीं मिला. एस बार भी राखी  बांधी और धमकी  देकर अपना तोहफा मांगी .  क्योंकि वे ही ऐसे हैं  जिनसे मै सारी बाते  बोलती  हूँ और  झगड़ा भी करती हूँ. 
            उनको जो  देना है देंगे  पर  मैं उनसे अभी नाराज हूँ. एक  बात है, हम जब  भगवन को अपने बीच  मानने लगते हैं तो  सब कुछ आसन सा लगता है और हमारी  सोंच भी उनके दैवी स्वरूप  को छोड़ मानवी स्वरूप में  बदल जाती है.
    आशा है इस  बार वे सबकी सुनेगे.

 

सोमवार, 8 अगस्त 2011

शिव के शाश्वत स्वरुप  का वर्णन अनंत है और हम  bholenath के स्वरुप की jitni गहराई में गोता लगाएँगे उतनी ही अभूतपूर्व शांति milegi .
               

गुरुवार, 4 अगस्त 2011


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